5 साल में दिल्ली में कई बड़े हादसे, मुंडका से ओल्ड राजेंद्र नगर और अब सत्य निकेतन तक नहीं थमा मौत का सिलसिला
सत्य निकेतन PG हादसे के बाद फिर सवालों में दिल्ली का सिस्टम, रेंट एग्रीमेंट से लेकर इमारत की हालत तक उठे बड़े सवाल
नई दिल्ली: दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में लड़कों के लिए चल रहे PG की इमारत ढहने के बाद राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था और अवैध निर्माण को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। हादसे में सात लोगों की मौत की जानकारी सामने आई है, जबकि कई अन्य लोग घायल हुए हैं। घटना के बाद राहत और बचाव दल ने मलबे में फंसे लोगों को निकालने के लिए अभियान चलाया।
दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस के नजदीक स्थित इस इमारत का इस्तेमाल छात्रों के रहने के लिए PG के तौर पर किया जा रहा था। बताया गया कि हादसे के समय इमारत में मरम्मत का काम चल रहा था। इसी दौरान अचानक बिल्डिंग का हिस्सा भरभराकर गिर गया और कई लोग मलबे के नीचे दब गए।
हादसे के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि जिस इमारत की हालत पहले से खराब बताई जा रही थी, उसमें छात्रों के रहने की व्यवस्था कैसे चल रही थी? क्या PG चलाने की अनुमति थी? पांच मंजिला इमारत के निर्माण के लिए जरूरी मंजूरी ली गई थी या नहीं? इन तमाम बिंदुओं पर जांच की जा रही है।
इमारत मालिक के खिलाफ लुकआउट नोटिस
सत्य निकेतन हादसे के बाद पुलिस और नगर निगम की कार्रवाई भी तेज हो गई है। इमारत के मालिक के खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी किए जाने की जानकारी सामने आई है।
वहीं, दिल्ली नगर निगम ने हादसे वाली इमारत के आसपास की संरचनाओं को लेकर भी कार्रवाई शुरू कर दी है। बगल की इमारत को खाली कराने के निर्देश दिए गए हैं। निगम की ओर से संबंधित मालिक को नोटिस देकर इमारत को निर्धारित समय के भीतर हटाने के लिए कहा गया है। निर्देश का पालन नहीं होने पर नगर निगम की ओर से खुद कार्रवाई किए जाने की बात कही गई है।
इस कदम के बाद आसपास की दूसरी इमारतों की सुरक्षा और उनकी स्थिति को लेकर भी प्रशासन की भूमिका पर चर्चा शुरू हो गई है।
रेंट एग्रीमेंट में जिम्मेदारी को लेकर क्या लिखा था?
सत्य निकेतन हादसे के बाद सामने आए एक रेंट एग्रीमेंट ने मामले को और गंभीर बना दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक, PG में रहने वाले किरायेदारों और परिसर की जिम्मेदारी से जुड़ी शर्तों में ऐसी बात दर्ज थी, जिसमें दुर्घटना, जोखिम या किसी तरह की जनहानि होने की स्थिति में PG संचालक की जिम्मेदारी सीमित किए जाने का उल्लेख था।
यानी एग्रीमेंट में हादसे की स्थिति में किरायेदार को होने वाले नुकसान या जान-माल की क्षति के लिए PG प्रबंधन की जिम्मेदारी से इनकार करने वाली शर्त शामिल होने की बात सामने आई है।
हालांकि, किसी रेंट एग्रीमेंट में ऐसी शर्त लिखे होने मात्र से कानूनी जिम्मेदारी तय नहीं हो जाती। हादसे की परिस्थितियों, इमारत की स्थिति, निर्माण और सुरक्षा नियमों के पालन समेत तमाम पहलुओं की जांच के बाद ही जिम्मेदारी तय होगी।
क्या दिल्ली ने पिछले हादसों से सबक लिया?
सत्य निकेतन की घटना कोई अकेला मामला नहीं है। पिछले कुछ वर्षों में दिल्ली में आग, इमारत गिरने और बेसमेंट में पानी भरने जैसी कई घटनाओं ने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं। हर बड़े हादसे के बाद जांच, कार्रवाई और नियमों को सख्त करने की बात होती रही, लेकिन कुछ समय बाद वही सवाल फिर सामने आ जाते हैं।
मुस्तफाबाद में ढही थी चार मंजिला इमारत
18 अप्रैल 2025 को मुस्तफाबाद इलाके में चार मंजिला इमारत गिरने की घटना में 11 लोगों की मौत हुई थी। हादसे में कई लोग घायल भी हुए थे। जांच के दौरान निर्माण और इलाके से जुड़े नियमों को लेकर भी सवाल सामने आए थे।
इस घटना ने घनी आबादी वाले इलाकों में पुराने और कमजोर भवनों की निगरानी को लेकर प्रशासन की तैयारियों पर सवाल खड़े किए थे।
ओल्ड राजेंद्र नगर में बेसमेंट बना मौत का कारण
27 जुलाई 2024 को दिल्ली के ओल्ड राजेंद्र नगर में एक कोचिंग सेंटर के बेसमेंट में पानी भरने से तीन सिविल सेवा अभ्यर्थियों की मौत हो गई थी।
भारी बारिश के बाद पानी तेजी से बेसमेंट में पहुंचा। उस समय वहां कई छात्र मौजूद थे। बाद की जांच में बेसमेंट के इस्तेमाल और वहां चल रही लाइब्रेरी की अनुमति को लेकर गंभीर सवाल सामने आए।
मामले में छात्रों के विरोध प्रदर्शन के बाद जांच को लेकर भी विवाद हुआ और आगे चलकर CBI जांच कराई गई। इस घटना ने कोचिंग सेंटरों में सुरक्षा व्यवस्था, बेसमेंट के व्यावसायिक इस्तेमाल और जल निकासी की व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा किया।
मुखर्जी नगर में कोचिंग सेंटर में लगी आग
15 जून 2023 को दिल्ली के मुखर्जी नगर में एक कोचिंग सेंटर में आग लग गई थी। शुरुआती तौर पर आग की वजह बिजली के मीटर में शॉर्ट सर्किट बताई गई थी।
घटना के समय बड़ी संख्या में छात्र इमारत के अंदर मौजूद थे। आग और धुएं के बीच कई छात्रों को काफी मुश्किल से बाहर निकाला गया। कुछ छात्रों ने खिड़कियों और पाइपों के सहारे नीचे उतरकर जान बचाई, जबकि कुछ को अन्य तरीकों से सुरक्षित बाहर निकाला गया।
इस हादसे में बड़ी संख्या में छात्र घायल हुए थे। घटना के बाद कोचिंग संस्थानों में फायर सेफ्टी और इमरजेंसी एग्जिट को लेकर सवाल उठे थे।
मुंडका अग्निकांड में गई थी 27 लोगों की जान
13 मई 2022 को पश्चिमी दिल्ली के मुंडका में एक चार मंजिला व्यावसायिक इमारत में भीषण आग लगी थी। इस हादसे में 27 लोगों की मौत हुई थी।
आग इमारत की पहली मंजिल से शुरू होने की जानकारी सामने आई थी। अंदर मौजूद लोगों को बाहर निकालने में काफी मुश्किल हुई और बचाव अभियान के लिए बड़ी संख्या में दमकल वाहन मौके पर पहुंचे थे।
मुंडका हादसे के बाद भी दिल्ली में इमारतों की फायर सेफ्टी, व्यावसायिक इस्तेमाल और नियमों के पालन को लेकर कई सवाल उठे थे।
अब सत्य निकेतन हादसे ने फिर खड़े किए वही सवाल
एक के बाद एक सामने आई इन घटनाओं को देखें तो सवाल सिर्फ किसी एक इमारत या एक हादसे तक सीमित नहीं रह जाता। मुद्दा यह है कि दिल्ली में पुराने और जर्जर भवनों की पहचान कितनी प्रभावी तरीके से की जा रही है? अवैध निर्माण पर समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं होती? PG और कोचिंग सेंटर जैसे स्थानों पर सुरक्षा मानकों की नियमित जांच होती है या नहीं?
सत्य निकेतन की घटना ने एक बार फिर इन सवालों को सामने ला दिया है। हादसे के बाद कार्रवाई जरूर शुरू हो गई है, लेकिन असली चुनौती यह है कि ऐसी कार्रवाई किसी दुर्घटना के बाद नहीं, बल्कि दुर्घटना से पहले हो।
दिल्ली जैसे घनी आबादी वाले शहर में जहां बड़ी संख्या में छात्र और किरायेदार PG, हॉस्टल और किराए के मकानों में रहते हैं, वहां भवनों की सुरक्षा और जरूरी मंजूरियों की जांच बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है। अब देखना होगा कि सत्य निकेतन हादसे की जांच के बाद सिर्फ जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई होती है या दिल्ली की पुरानी इमारतों और PG व्यवस्था को लेकर कोई व्यापक कदम भी उठाया जाता है।





